लेखक · 1 रचनाएँ
ऑलिवर नेपोलियन हिल का जन्म 26 अक्टूबर 1883 को वर्जीनिया के वाइज़ काउंटी में पाउंड के पास एक कमरे की झोपड़ी में हुआ। यह अपलेशियन पहाड़ों का एक ग़रीब कोना था; पिता जेम्स दाँतों का काम करके घर चलाते थे। माँ सारा तब चल बसीं, जब वह नौ बरस का था। पिता की दूसरी पत्नी मार्था पढ़ी-लिखी औरत थीं: उन्होंने बच्चे को स्कूल भेजा और उसके हाथ में एक टाइपराइटर थमा दिया।
तेरह की उम्र में वह पहाड़ी क़स्बों के छोटे अख़बारों के लिए ख़बरें लिखने लगा; बाद में उसने ख़ुद माना कि जिन हफ़्तों में ख़बर नहीं होती थी, वह उन्हें गढ़ लेता था। सत्रह में स्कूल पूरा किया, कुछ दिन वाणिज्य की पढ़ाई की, और 1901 में वकील तथा कोयला व्यवसायी रूफस एयर्स के यहाँ काम पर लगा। लकड़ी से लेकर मोटरगाड़ी के स्कूल तक, उसके कारोबार एक के बाद एक बैठते गए; 1908 में वह वॉशिंगटन चला गया और 1919 में शुरू की गई पत्रिका ‘हिल्स गोल्डन रूल’ ने आख़िरकार उसे पाठक दिए।
1928 में आठ खंडों का ‘सफलता का नियम’ छपा, जिसने उसे थोड़े समय की सुख-सुविधा दी। असली उछाल महामंदी के बीचोबीच आया — 1937 में छपी ‘सोचिए और अमीर बनिए’। उसने अपनी कहानी इस दावे पर टिकाई कि 1908 में एंड्रयू कार्नेगी ने उसे सफलता का दर्शन रचने का काम सौंपा था; उस मुलाक़ात की पुष्टि करने वाला कोई दस्तावेज़ नहीं मिला। 1952 के बाद उसने डब्ल्यू. क्लेमेंट स्टोन के साथ कक्षाएँ लीं और 1963 में अपना न्यास बनाया।
छोटे वाक्य, आदेश देता स्वर, बार-बार दोहराए जाने वाले सूत्र — उसने ऐसी भाषा गढ़ी जो इच्छा, विश्वास और लगन को नपे-तुले क़दमों में बदल देती थी। किताबों को सजाने वाले मशहूर उद्योगपतियों से मुलाक़ातों के अधिकतर क़िस्से प्रमाणित नहीं हो सके, फिर भी कहने का यह ढंग आत्मविकास की विधा का साँचा बन गया। 8 नवंबर 1970 को दक्षिण कैरोलिना के ग्रीनविल में, सत्तासी वर्ष की आयु में उसका देहांत हुआ।
हिल ने अमेरिका की उस पुरानी आदत के भीतर लिखा जो धन को चरित्र का मामला मानती है: मन की शक्ति में न्यू थॉट आंदोलन का भरोसा, ओरिसन स्वेट मार्डन की सफलता-पुस्तिकाएँ और प्रोटेस्टेंट श्रम-नीति उसकी ज़मीन थीं। 1929 की गिरावट के बाद बेरोज़गार हुए लाखों पाठक ऐसी भाषा की ओर मुड़े जो ग़रीबी को अर्थव्यवस्था नहीं, आत्मा का रोग बताती थी। 1936 में डेल कार्नेगी की ‘लोक व्यवहार’ के साथ आत्मविकास अपना बाज़ार रखने वाली एक विधा बन गया।