
Fyodor Dostoyevski
दोस्तोयेव्स्की द्वारा अपने ही जुए की लत से प्रेरित होकर 29 दिनों में लिखा गया उपन्यास 'जुआरी', जुनून, धन और मानव मनोविज्ञान पर आधारित एक क्लासिक कृति है। रौलेटनबर्ग में सेट, यह कहानी अलेक्सी इवानोविच के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पोलिना के प्रति अपने प्रेम और रूले टेबल के प्रति अपने विनाशकारी जुनून, कर्ज के चक्र और रूसी-यूरोपीय संघर्ष में बर्बाद हो जाता है।
अलेक्सी इवानोविच का पोलिना (जो उसके स्वाभिमान को कुचलती है) के प्रति अपने आत्मघाती और विनाशकारी प्रेम तथा रूले की मेज़ (जो उसे एकाएक सत्ता, दौलत और बदले का अवसर देती है) के प्रति अपनी लत के बीच का आंतरिक संघर्ष। इसके समानांतर, जनरल के परिवार का अपनी दौलत खोने के डर से अपेक्षित विरासत के प्रति अपनी हताशा भरी ज़रूरत से गढ़ा गया बाह्य संघर्ष।
रूलेटनबर्ग नाम का एक काल्पनिक जर्मन स्पा और जुआ शहर। उपन्यास के अंतिम हिस्सों में पेरिस और आंशिक रूप से होम्बर्ग तथा बाडेन।
19वीं सदी का मध्य। (मूल पाठ में टेलीग्राम के उपयोग, ट्रेन यात्राओं, जर्मन-प्रशियाई सांस्कृतिक संदर्भों और जनरल पेरोव्स्की के संस्मरणों के संदर्भों से पुष्ट)।
तनावपूर्ण, उग्र, उदासी भरा और अराजक। उपन्यास की हर पंक्ति में विलासितापूर्ण होटलों और कैसीनो हॉलों का दमघोंटू, सम्मोहक और विनाशकारी वातावरण झलकता है, जहाँ लोग अपने जुनून और धन के लालच के आगे घुटने टेक देते हैं।
प्रथम पुरुष सीमित कथावाचक (अलेक्सी इवानोविच)। वर्णन अत्यंत व्यक्तिपरक, भावुक, उग्र, कभी-कभी पागलपन की हद तक पहुँचने वाला और अविश्वसनीय है। इसमें एक दार्शनिक लहजा है जो अपनी ही कमज़ोरियों की आलोचना भी करता है और उन्हीं में बह भी जाता है।
सामाजिक प्रतिष्ठा, नैतिकता और संबंध पूरी तरह से धन और भौतिक शक्ति के इर्द-गिर्द तय होते हैं। समाज की नज़रों में प्रतिष्ठित दिखना ('comme il faut') वास्तविक नैतिकता से अधिक महत्वपूर्ण है। कैसीनो एक ऐसा निर्मम अखाड़ा है जहाँ सभी सामाजिक वर्ग समान हो जाते हैं, लेकिन साथ ही कमज़ोरियों को बेरहमी से दंडित किया जाता है। रहस्यों और कर्ज़ों को छुपाकर रखना अत्यंत आवश्यक है।
एक सर्वदेशीय यूरोपीय स्पा शहर में, रूसियों का अनुशासनहीन, भावुक, अनियंत्रित और फ़िज़ूलखर्च स्वभाव; फ्रांसीसियों का औपचारिकता-प्रिय, अहंकारी और स्वार्थी मिज़ाज; जर्मनों की व्यवस्थित और संचयशील ('vater') प्रवृत्ति; तथा अंग्रेजों का शांत, गरिमापूर्ण और तर्कसंगत दृष्टिकोण—इनके बीच के सांस्कृतिक विरोधाभास इस कृति की पृष्ठभूमि का निर्माण करते हैं।
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अलेक्सी, पोलिना से एक जुनूनी और दासतापूर्ण प्रेम से बंधा हुआ है। पोलिना उसकी भावनाओं को तुच्छ समझती है, उसे अपमानित करती है और उसका इस्तेमाल करती है; लेकिन भीतर ही भीतर वह उसके प्रति विश्वास और नफ़रत का मिला-जुला अहसास रखती है। शक्ति का संतुलन शुरुआत में पोलिना के पक्ष में होता है, जो अलेक्सी द्वारा भारी धनराशि जीतने के बाद अचानक टूटकर बिखर जाता है।
श्लांगेनबर्ग में पोलिना अलेक्सी को कूदने के लिए कहकर उसकी किस्मत से बेरहमी से खेलती है; वहीं अलेक्सी तब सन्न रह जाता है जब पोलिना उसके चेहरे पर एक लाख फ्लोरिन फेंक मारती है।
मिस्टर एस्टली, अलेक्सी के बिल्कुल विपरीत हैं; शांत, गरिमापूर्ण और संतुलित। दोनों ही पोलिना से प्रेम करते हैं। एस्टली, अलेक्सी के नैतिक पतन को देखते हुए उसे ईमानदार सलाह देते हैं, उसका सम्मान करते हैं लेकिन उपन्यास के अंत में उसकी निराशाजनक स्थिति का स्पष्ट मूल्यांकन करते हैं।
होम्बर्ग में अलेक्सी के मिलने पर एस्टली उसे बचाने के लिए पैसे देते हैं, लेकिन उसके मुंह पर ही कह देते हैं कि वह रूले और अपने रूसी स्वभाव के कारण बर्बाद हो चुका इंसान है।
अलेक्सी, दे ग्रियू की सतही, स्वार्थी फ्रांसीसी शिष्टता और पोलिना पर उसके प्रभाव से घृणा करता है। वहीं दे ग्रियू अलेक्सी को एक मामूली, साधारण शिक्षक (outchitel) समझकर नीची नज़र से देखता है, लेकिन जब परिस्थितियाँ नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं तो वह उससे डरने लगता है।
अलेक्सी खाने की मेज़ पर फ्रांसीसियों के झूठे स्वाभिमान और रवैये का उपहास उड़ाकर दे ग्रियू को खुलेआम भड़काता है।
दोनों ही भावुक, हठी और ठेठ रूसी स्वभाव के हैं। दादी शुरुआत में अलेक्सी को अपने अधीन कर लेती हैं और मेज़ पर दांव लगाने के लिए उसका इस्तेमाल करती हैं। अलेक्सी उस महिला के अनियंत्रित पतन को देखकर स्तब्ध भी होता है और उसके विद्रोही रवैये से एक प्रकार का विचित्र आनंद भी प्राप्त करता है।
जब दादी रूले की मेज़ पर अपना सारा पैसा शून्य (ज़ीरो) पर लगा देती हैं, तो अलेक्सी उनके इस पागलपन का विरोध नहीं कर पाता और नियति के प्रवाह में बह जाता है।
पोलिना पहले दे ग्रियू से प्रेम करती थी और खुद को उसे सौंप चुकी थी। दे ग्रियू परिवार के कर्ज़ों का हवाला देकर उसका भावनात्मक शोषण करता है। जब दादी की विरासत हाथ से निकल जाती है, तो दे ग्रियू पोलिना को छोड़ देता है। पोलिना का उसके प्रति प्रेम गहरी घृणा और विरक्ति में बदल जाता है।
पोलिना, दे ग्रियू द्वारा लिखा गया विदाई पत्र अलेक्सी को दिखाकर उसके प्रति अपने आक्रोश और अपमान के अहसास को उड़ेल देती है।
मिस्टर एस्टली, पोलिना के प्रति गहरे सम्मान और मूक प्रेम से समर्पित हैं। संकट की घड़ी में, जब सब लोग पोलिना को छोड़ देते हैं, तो वह सबसे सुरक्षित ठिकाने के रूप में एस्टली की शरण में जाती है। शक्ति का संतुलन एस्टली द्वारा प्रदान की जाने वाली नैतिक और भौतिक सुरक्षा पर टिका है।
पोलिना, अलेक्सी के संकट और जनरल के पतन के बाद होटल से भागकर सीधे मिस्टर एस्टली के होटल में शरण लेती है।
जनरल दादी माँ की मृत्यु और उनकी विरासत को लेकर जुनूनी हो चुका है। जब दादी माँ अचानक प्रकट होती हैं, तो जनरल पर मानो दहशत और लकवे का दौरा पड़ जाता है। जैसे-जैसे वह एक-एक सोने का सिक्का हारती जाती हैं, जनरल की उम्मीदें और मानसिक संतुलन चूर-चूर होते जाते हैं।
जनरल अपने अध्ययन कक्ष में, दादी माँ के मरने की उम्मीदों पर पानी फिर जाने पर फूट-फूट कर रोता है और ज़मीन पर लोटने लगता है।
जनरल, ब्लांश के प्यार में पूरी तरह अंधा है और अपने सम्मान की तनिक भी परवाह नहीं करता। दूसरी ओर, ब्लांश पूरी तरह अवसरवादी है; जब तक विरासत मिलने की संभावना रहती है, वह जनरल को अपने वश में रखती है, लेकिन विरासत हाथ से निकलते ही उसे किसी फटे चिथड़े की तरह फेंक देती है।
जब ब्लांश को समझ आता है कि दादी माँ अपना सब कुछ हार चुकी हैं, तो वह जनरल को अपने कमरे से निकाल देती है; और जनरल उसके पीछे भागते हुए अपमानित होता है।
अलेक्सी के भारी दौलत जीतने के बाद, ब्लांश उसके पीछे लग जाती है और उसे पेरिस ले जाती है। दोनों ही इस बात से भली-भांति वाकिफ हैं कि यह रिश्ता पूरी तरह से एक आर्थिक शोषण है। अलेक्सी उसे जानबूझकर अपने पैसे उड़ाने देता है और इस स्थिति की बेतुकी निरर्थकता व घिनौनेपन का मज़ाक उड़ाता है।
ब्लांश, अलेक्सी द्वारा जीते गए दो लाख फ्रैंक में से अधिकांश अपनी विलासिता पर खर्च कर देती है और खुले तौर पर व्यंग्यात्मक लेकिन ईमानदार लहजे में उसे मूर्ख बताती है।