
Alexandre Dumas
द थ्री मस्कटियर्स अलेक्जेंड्रे ड्यूमा द्वारा लिखित एक विश्व-प्रसिद्ध ऐतिहासिक साहसिक उपन्यास है, जो डार्टग्नन (d'Artagnan) नामक एक बहादुर युवक के रोमांच का विवरण देता है, जो राजा के रक्षक दल में शामिल होने की इच्छा के साथ 17वीं सदी के फ्रांस पहुँचता है। पेरिस पहुँचते ही, डार्टग्नन खुद को शाही साज़िशों, राजनीतिक षड्यंत्रों और खतरनाक द्वंद्वों के बीच फँसा हुआ पाता है।
डी'आर्तान्यां और उसके वफ़ादार मित्र तीन बंदूकधारियों (मस्कटियर्स) द्वारा महारानी ऐन के सम्मान और इस प्रकार फ़्रांस की शांति की रक्षा के लिए इंग्लैंड जाकर हीरों को वापस लाने का प्रयास; दूसरी ओर कार्डिनल रिशलू द्वारा अपनी राजनीतिक और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए उन्हें किसी भी कीमत पर रोकने के उद्देश्य से बिछाए गए घातक जाल।
पेरिस की अंधेरी गलियाँ, लूवर महल, मोसिए द त्रेवील की हवेली, बास्तील की कालकोठरियाँ और फ्रांस से इंग्लैंड तक जाने वाले यात्रा मार्ग (एमिएन्स, कैले)।
लगभग वर्ष 1625 (17वीं शताब्दी का पूर्वार्ध)।
17वीं शताब्दी के फ़्रांस के राजनीतिक षड्यंत्रों, असीम खतरों, सम्मान की लड़ाइयों और तलवारों की खनक से भरा एक सामंती, तनावपूर्ण और साहसिक परिवेश।
सर्वज्ञ, समय-समय पर सीधे पाठक से संवाद करने वाला, प्रबुद्ध, सूक्ष्म व्यंग्य से युक्त और सम्मोहक शैली वाला अन्य पुरुष निष्पक्ष कथावाचक।
मान-सम्मान और प्रतिष्ठा किसी व्यक्ति के जीवन, यहाँ तक कि उसकी संपत्ति से भी कहीं बढ़कर है। कुलीनों और बंदूकधारियों के बीच छिड़ा कोई भी विवाद बिना रक्तपात या पूर्ण विजय के समाप्त नहीं होता। साम्राज्य की सुरक्षा राजा और कार्डिनल के बीच के गुप्त वर्चस्व के संघर्ष से तय होती है। बंदूकधारी केवल अपने सेनापतियों और राजा के प्रति जवाबदेह होते हैं, जबकि कार्डिनल के अंगरक्षकों के साथ उनका द्वंद्वयुद्ध गैरकानूनी होने के बावजूद मौन रूप से समर्थित होता है।
राजा लुई तेरहवें के शासनकाल के दौरान, जब कार्डिनल रिशलू सत्ता की बागडोर संभाले हुए थे, और इंग्लैंड (प्रोटेस्टेंट), फ़्रांस (कैथोलिक) तथा स्पेन के बीच राजनयिक तनाव चरम पर था, ऐसा दमनकारी और श्रेणीबद्ध यूरोपीय संदर्भ।
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शुरुआत में एक चुनौती के साथ शुरू हुआ उनका संबंध कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने के बाद गहरी प्रशंसा और पारस्परिक बलिदान में बदल गया। आथोस जहाँ डी'आर्तान्यां की रणनीतिक बुद्धि की सराहना करता है, वहीं डी'आर्तान्यां आथोस के कुलीन और संयमित व्यवहार का आदर करते हुए उसे अपना नैतिक मार्गदर्शक मानता है।
कार्डिनल के अंगरक्षकों के साथ हुई पहली बड़ी मुठभेड़ में जब आथोस घायल था, तब डी'आर्तान्यां उसकी जान बचाता है और बाद में जब गुप्त यात्रा की योजनाएँ बनाई जाती हैं, तो आथोस 'तुम एक साहसी व्यक्ति हो, मैं तुम्हारा अनुसरण करने को तैयार हूँ' कहकर नेतृत्व उसे सौंप देता है।
डी'आर्तान्यां भले ही पोर्थोस के दिखावे और डींग मारने के स्वभाव का अक्सर मज़ाक उड़ाता है, फिर भी वह युद्ध में उसकी ताकत और उसकी संगति पर गहरा विश्वास करता है। पोर्थोस कभी-कभी इस गैस्कन की बुद्धिमत्ता से चकित होकर उसकी बात मान लेता है।
मोसिये द त्रेविल की हवेली में अपनी पहली मुलाकात के दौरान, डी'आर्तान्यां अनजाने में पोर्थोस के चमकीले कंधे के पट्टे के पिछले हिस्से के नकली होने का पता लगा लेता है और उसे शर्मिंदा कर देता है, जिसके कारण उसे द्वंद्वयुद्ध की चुनौती दी जाती है।
अरामिस के गुप्त प्रेम-संबंधों को अनजाने में उजागर करने पर डी'आर्तान्यां शुरुआत में उसकी शत्रुता मोल ले लेता है, लेकिन बाद में डी'आर्तान्यां की शालीनता और साहस, अरामिस के पादरी-मुखौटे के पीछे छिपे शूरवीर हृदय को उसके प्रति आकर्षित कर लेते हैं।
ज़मीन पर मिले एक महिला के रूमाल के कारण उसका अरामिस से तीखा टकराव होता है, लेकिन जब वे अंगरक्षकों से लड़ते हैं, तो यह प्रतिद्वंद्विता एक अटूट निष्ठा में बदल जाती है।
डी'आर्तान्यां को उससे पहली नज़र में ही गहरा प्रेम हो जाता है। उनका संबंध डी'आर्तान्यां द्वारा उसे बचाने के साथ पनपता है। डी'आर्तान्यां अपनी जान की बाज़ी लगाकर उस महिला और उसके द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली महारानी की रक्षा करने का बीड़ा बड़े उत्साह से उठाता है।
जब डी'आर्तान्यां महारानी के लिए लंदन जाने को सहमत होता है, तो वह मैदाम बोनासियो की ओर मुड़कर कहता है कि 'मैं आपसे प्रेम करता हूँ, यदि मैं इस आदेश को पूरा करता हूँ तो मेरा सबसे बड़ा इनाम यही होगा कि आपके मन में भी मेरे लिए ऐसी ही भावनाएँ हों' जैसा भाव व्यक्त करता है।
राजा जहाँ मजबूरी में कार्डिनल की कुशाग्र बुद्धि और अद्वितीय क्षमता के आगे झुकता है, वहीं अपने अधिकार के दब जाने से हमेशा असहज रहता है। दूसरी ओर, कार्डिनल राज्य को अपनी उंगलियों पर नचाता है और राजा को केवल अपने लक्ष्यों की पूर्ति के साधन के रूप में इस्तेमाल करता है।
जब कार्डिनल के आदमियों और राजा के बंदूकधारियों के बीच तलवारें खिंच जाती हैं, तो राजा मन ही मन अपने बंदूकधारियों द्वारा कार्डिनल के आदमियों को हराने पर बेहद खुश होता है और डी'आर्तान्यां को छह सौ एक्यू का पुरस्कार देता है।
बकिंघम को महारानी के प्रति इतना गहरा जुनून है कि वह इसके लिए पूरे फ़्रांस और इंग्लैंड को युद्ध में झोंकने तक को तैयार है। वहीं महारानी अपनी पदवी के बोझ और उसके प्रति अपनी भावनाओं के बीच पिसती रहती है और बेबसी से उसे लौटाने तथा किसी अनहोनी को टालने का प्रयास करती है।
महारानी अपनी गुप्त मुलाकात में ड्यूक से लंदन लौटने की विनती करती है और अपने दिल व भावनाओं के प्रतीक के रूप में उसे शीशम के बक्से में रखे हीरे के लटकन उपहार में देती है।
उनकी पहली मुलाक़ात में उड़ाया गया मज़ाक और शारीरिक हार डी'आर्तन्याँ पर एक गहरा आघात छोड़ती है। जब रोशफ़ोर उसका पत्र भी चुरा लेता है, तो यह दुश्मनी बदले की एक अटूट इच्छा में बदल जाती है।
पेरिस की गलियों में जब भी डी'आर्तन्याँ इस काले बालों और चेहरे पर घाव के निशान वाले आदमी को देखता है, तो वह अपना सबसे महत्वपूर्ण काम भी तुरंत छोड़कर, तलवार थामे पागलों की तरह उसके पीछे दौड़ पड़ता है।
एक पुराने दोस्त के बेटे डी'आर्तन्याँ को अपने संरक्षण में लेकर त्रेवील उस नौजवान के उतावलेपन को नियंत्रित करता है और उसे दरबार तथा सैन्य अनुशासन में जीवित रहना सिखाता है।
वह पहले ही दिन से डी'आर्तन्याँ को सलाह देता है, कार्डिनल और राजा के बीच की खींचतान में सतर्क रहने की ताकीद करता है और अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए उसके वास्ते एक सिफ़ारिशी पत्र लिखता है।
उन दोनों के बीच ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ है। जहाँ स्त्री वफ़ादार, युवा, राज़दार और रानी के लिए अपनी जान तक देने को तैयार है, वहीं उसका पति सिर्फ़ अपनी जेब के बारे में सोचने वाला, डरपोक और ज़रा से दबाव में पाला बदलने वाला इंसान है।
मोसिए बोनासिए जब कार्डिनल और रोशफ़ोर द्वारा ख़रीद लिया जाता है, तो वह तुरंत अपनी पत्नी पर आरोप लगाने और कार्डिनल के लिए जासूसी करने लगता है, जबकि मैडम बोनासिए अपने पति पर 'नीच और मूर्ख' आदमी बन जाने का आरोप लगाती हैं।
प्लांशे शुरुआत में अपने मालिक की कंगाली से नाख़ुश रहता है, लेकिन समय के साथ डी'आर्तन्याँ का साहस, कठिन समय में उसका दृढ़ संकल्प और ईमानदारी प्लांशे के दिल में उसके प्रति निस्वार्थ सम्मान और निष्ठा पैदा कर देती है।
डी'आर्तन्याँ द्वारा उसकी जमकर पिटाई किए जाने के बाद 'मेरे साथ तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल है' का वादा प्लांशे में आदर जगाता है; लंदन अभियान के दौरान वह 'मैं पिकार्डी का निवासी हूँ' कहकर अपने मालिक के आगे निडर होकर दुश्मनों पर टूट पड़ता है।