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उनका जन्म 13 नवम्बर 354 को उत्तरी अफ़्रीका के रोमन प्रांत नुमिदिया के छोटे से नगर थगास्ते में हुआ। पिता पात्रिकियुस नगर के मामूली अधिकारी थे और उन्होंने मूर्तिपूजक आस्था मृत्यु के निकट आकर ही छोड़ी; माता मोनिका ईसाई थीं और बेटे पर अपनी पकड़ उन्होंने कभी ढीली नहीं होने दी। उन्होंने मादौरोस में और फिर कार्थेज में व्याकरण तथा वक्तृत्व पढ़ा; क़स्बे से आए इस किशोर ने बड़े शहर में अपनी महत्वाकांक्षा और अपना भटकाव, दोनों पाए।
अठारह की उम्र में सिसरो का 'होर्तेंसियस' पढ़कर वे दर्शन की ओर मुड़े। लगभग नौ वर्ष वे मानी-मत के 'श्रोताओं' के घेरे में रहे और थगास्ते तथा कार्थेज में वक्तृत्व पढ़ाते रहे। कार्थेज में जिस स्त्री के साथ वे रहते थे, उससे उनका बेटा अदेओदातुस हुआ। 383 में वे रोम गए और वहाँ से शाही दरबार के नगर मिलान पहुँचे, जहाँ नगर से वेतन पाने वाले वक्तृत्व-आचार्य नियुक्त हुए।
मिलान में बिशप अम्ब्रोस के प्रवचनों और नवप्लेटोवादी ग्रंथों ने उन्हें मानी-मत से अलग कर दिया। 386 की गर्मियों में एक बग़ीचे में सुनी गई 'उठाओ और पढ़ो' की आवाज़ पर उन्होंने पौलुस का पत्र खोला — यही उनके जीवन का मोड़ बना। अगले वर्ष ईस्टर पर अम्ब्रोस ने उन्हें बपतिस्मा दिया। अफ़्रीका लौटते हुए ओस्तिया में उन्होंने माँ को खो दिया। थगास्ते में उन्होंने मठ जैसा एक समुदाय बसाया, 391 में हिप्पो रेगियुस में पुरोहित और 395 के आसपास बिशप बने।
'स्वीकारोक्तियाँ' उन्होंने 397 से 400 के बीच लिखी: ईश्वर को संबोधित और अपने ही अतीत को खँगालती इस किताब ने पश्चिम में अंतर्जगत लिखने का ढंग बदल दिया। 410 में रोम की लूट के बाद उन्होंने 'ईश्वर का नगर' शुरू किया, जिसे पूरा करने में वर्षों लगे। स्मृति, इच्छा और समय से जिरह करती उनकी शैली ने धर्मशास्त्र के गद्य को स्वीकार और आत्मपरीक्षा की भाषा बना दिया। 28 अगस्त 430 को वैंडलों से घिरे हिप्पो में उनका देहांत हुआ।
उन्होंने उत्तर-पुरातन काल में लिखा, जब पश्चिमी रोमन साम्राज्य बिखरने लगा था और ईसाइयत राजधर्म बन चुकी थी। उत्तरी अफ़्रीका के गिरजे दोनातवादी विभाजन से फटे हुए थे और मानी-मत तथा पेलागियसवाद पर तीखी बहसें चल रही थीं। शास्त्रीय लातीनी वक्तृत्व और नवप्लेटोवाद अब भी शिक्षा की रीढ़ थे; 410 में गोथों द्वारा रोम की लूट ने उस युग का आत्मविश्वास हिला दिया। इसी चौराहे पर ऑगस्टीन ने मूर्तिपूजक विरासत और ईसाई आस्था को एक ही भाषा बुलवाने की कोशिश की।