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गुस्ताव फ़्लोबेर का जन्म 12 दिसंबर 1821 को रूआं में हुआ। उनके पिता अशील-क्लेओफ़ास फ़्लोबेर शहर के ओतेल-द्यू अस्पताल के मुख्य शल्य-चिकित्सक थे और परिवार अस्पताल के भीतर बने आवास में रहता था; बीमारी और मौत उस बच्चे के लिए रोज़मर्रा का सामान्य हिस्सा थीं। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने लिखना शुरू कर दिया था।
परिवार की इच्छा से उन्होंने पेरिस में क़ानून पढ़ा, पर 1844 का स्नायु-दौरा, जिसे उस दौर के चिकित्सकों ने मिर्गी माना, उनकी पढ़ाई ख़त्म कर गया। वे रूआं के पास क्रुआसे में जा बसे और बाक़ी ज़िंदगी वहीं अपनी मेज़ पर बिताई। 1849 में उन्होंने चार दिन तक अपने मित्रों लुई बुइए और मैक्सिम द्यू कां को संत एंटनी का प्रलोभन पढ़कर सुनाया; दोनों का फ़ैसला यह था कि पांडुलिपि आग में डाल दें और उसका ज़िक्र फिर कभी न करें। इसके तुरंत बाद वे द्यू कां के साथ मिस्र और पूर्वी भूमध्यसागर की लंबी यात्रा पर निकल गए।
1856 में जब मैडम बोवारी «रवियू द पारी» (Revue de Paris) में धारावाहिक छपी, अभियोजन ने उन पर सार्वजनिक नैतिकता भंग करने का मुक़दमा चलाया; सुनवाई जनवरी 1857 में शुरू हुई और फ़रवरी में बरी होने के साथ ख़त्म हुई, और उसी साल छपी किताब ख़ूब बिकी। इसके बाद आईं सलामबो और भावनाओं की शिक्षा को ठंडा प्रतिसाद मिला। 1870 में प्रशियाई सैनिक क्रुआसे के उनके घर में आ जमे, 1872 में माँ चल बसीं, और 1875 में भांजी कैरोलीन के परिवार पर आए दिवाले ने उनकी सारी संपत्ति निगल ली।
सही शब्द — le mot juste — मिलने तक वे अपने वाक्य ज़ोर से पढ़ते और महीनों दुबारा लिखते रहते थे; कथावाचक को पीछे हटाकर पात्र की आवाज़ को तीसरे पुरुष में रिसने देने की उनकी तकनीक आधुनिक उपन्यास के बुनियादी औज़ारों में से एक बन गई। 1877 में छपी तीन कहानियाँ ने उन्हें उनके पाठक लौटा दिए; ज़ोला और मोपासां उन्हें अपना गुरु मानते थे। 8 मई 1880 को क्रुआसे में मस्तिष्क-रक्तस्राव से उनका निधन हुआ और बुवार और पेक्यूशे अधूरा रह गया।
फ़्लोबेर ने उस दहलीज़ पर लिखा जहाँ स्वच्छंदतावाद का जोश चुक चुका था और यथार्थवाद को अभी-अभी उसका नाम मिला था। औद्योगिक होते फ़्रांस में उपन्यास अख़बारी धारावाहिकों के ज़रिये बड़े पाठक-वर्ग तक पहुँच रहा था। द्वितीय साम्राज्य की सेंसरशिप में एक ही अभियोजक ने एक ही साल मैडम बोवारी और बोदलेयर की बुराई के फूल पर अनैतिकता का अभियोग लगाया। बहस यह थी कि कला नैतिकता की ऋणी है या नहीं; पक्ष न लेने और फ़ैसला न सुनाने वाले कथन की पैरवी करके फ़्लोबेर ने प्रकृतवादियों के लिए ज़मीन तैयार की।