लेखक · 1 रचनाएँ
निकोलो मैकियावेली का जन्म 3 मई 1469 को फ्लोरेंस में हुआ। पिता बेरनार्दो ने कानून पढ़ा था, पर कर्ज़ के कारण पेशा खुलकर नहीं चला सके; माता का नाम बार्तोलोमेआ दे' नेल्ली था। घर में पुराना नाम बचा था, पैसा नहीं। सात बरस की उम्र में उसने लातीनी सीखनी शुरू की, पर उसका असली विद्यालय पिता का वह पुस्तकालय था, जो रोमी लेखकों से भरा था।
सवोनारोला के पतन के बाद, 1498 में, उनतीस वर्ष की आयु में वह फ्लोरेंस गणराज्य की द्वितीय चांसरी का सचिव चुना गया। चौदह वर्ष वह राजदूती कामों पर सड़कों पर रहा: 1502 में चेज़ारे बोर्जा के शिविर में महीनों प्रतीक्षा की, 1510 में लुई बारहवें के दरबार गया। उसका लेखन इन्हीं रपटों में जन्मा; वहीं उसने राज्यों, सेनाओं और मनुष्यों को ठंडी आँख से बयान करना सीखा।
1512 में मेदिची परिवार के फ्लोरेंस लौटते ही उसका पद जाता रहा; अगले बरस षड्यंत्र के संदेह में उसे कैद कर यातना दी गई। वह सांतांद्रेया इन पेरकुसीना के अपने खेत पर चला गया। दिसंबर 1513 में फ्रांचेस्को वेत्तोरी को लिखे पत्र में उसने बताया कि दिन किसानों के बीच बीतते हैं और शामें प्राचीन लेखकों के सामने, एक छोटी-सी किताब लिखते हुए — 'द प्रिंस'। इसके बाद 'तितुस लिवियुस पर विमर्श', 'युद्ध की कला', 'मांद्रागोला' और 'फ्लोरेंस का इतिहास' आए।
उसकी भाषा छोटी, कठोर और बिना सजावट की है; नैतिक फ़ैसला सुनाने के बजाय वह चीज़ों को जैसी हैं वैसी देखने का दावा करती है। उसने राजनीति को धर्मशास्त्र और सद्गुण की भाषा से अलग कर उसे अपने आप में अध्ययन का विषय बनाया, और इतालवी गद्य को बोलचाल के निकट एक जीवित स्वर दिया। 1527 में मेदिची फिर निकाले गए तो उसने पुराने पद की आस बाँधी, पर बीते संबंध उसके विरुद्ध पड़े। 21 जून 1527 को फ्लोरेंस में उसकी मृत्यु हुई और सांता क्रोचे में वह दफ़नाया गया।
मैकियावेली ने उन युद्ध-वर्षों में लिखा जब फ्रांसीसी, स्पानी और साम्राज्यी सेनाएँ इटली को आपस में बाँट रही थीं; प्रायद्वीप आपस में लड़ते छोटे राज्यों और सांसारिक सत्ता के पीछे भागते पोपतंत्र में बँटा था। प्राचीनता की ओर लौटता मानववाद उसकी भी ज़मीन थी, पर शासकों को सद्गुण सिखाने वाले पुराने 'राजदर्पण' के ढाँचे को उसने उलट दिया। गणतंत्र और मेदिची शासन के बीच झूलता फ्लोरेंस उसकी बहस के केंद्र में था, और लातीनी के बजाय जनता की इतालवी में लिखना उसी चुनाव का हिस्सा था।