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आर्थर कॉनन डॉयल का जन्म 22 मई 1859 को एडिनबरा में आयरिश मूल के एक कैथोलिक परिवार में हुआ। पिता चार्ल्स आल्टामॉन्ट डॉयल प्रतिभाशाली चित्रकार थे, पर शराब और बीमारी ने उनकी नौकरी छीन ली और अंतिम वर्ष उन्होंने पागलख़ानों में बिताए। घर को थामे रखा माँ मेरी फ़ोली ने, जिनकी सुनाई कहानियों ने बालक की कल्पना को सींचा। डॉयल ने लंकाशायर के जेसुइट आवासीय विद्यालयों में सात वर्ष और ऑस्ट्रिया में एक वर्ष बिताया।
1876 में उन्होंने एडिनबरा विश्वविद्यालय में चिकित्सा पढ़ना शुरू किया। छात्र रहते हुए वे आर्कटिक के एक व्हेल-शिकारी जहाज़ पर और पश्चिम अफ़्रीका जाने वाले एक भाप-पोत पर जहाज़ी डॉक्टर बनकर गए। 1882 में साउथ्सी में अपना दवाख़ाना खोला और रोगियों की प्रतीक्षा में बीतते लंबे घंटे लिखकर भरे। शल्यचिकित्सा के अपने शिक्षक जोसेफ़ बेल की उस दृष्टि से प्रेरणा लेकर, जो एक नज़र में रोगी का इतिहास पढ़ लेती थी, उन्होंने शेरलॉक होम्स को गढ़ा और 1887 में ‘स्टडी इन स्कारलेट’ प्रकाशित की।
असली सफलता 1891 से ‘द स्ट्रैंड’ पत्रिका में छपने लगी कहानियों से मिली; इन्हीं से ‘शेरलॉक होम्स के कारनामे’ संकलित हुआ। जब जासूस लेखक पर ही भारी पड़ने लगा, तो 1893 में उन्होंने उसे राइशेनबाख जलप्रपात में गिरा दिया, फिर पाठकों के दबाव में झुककर ‘बास्करविल का शिकारी कुत्ता’ में लौटा लाए। उन्होंने ऐतिहासिक उपन्यास भी लिखे और ‘खोई हुई दुनिया’ के साथ विज्ञान-कथा में क़दम रखा; बोअर युद्ध में ब्रिटेन के आचरण के बचाव में लिखी पुस्तिका के बाद 1902 में उन्हें नाइट की उपाधि मिली। ग़लत ढंग से दोषी ठहराए गए जॉर्ज एडाल्जी को निर्दोष सिद्ध कराने के उनके अभियान ने इंग्लैंड में आपराधिक अपील अदालत की स्थापना में योगदान दिया।
सादे, तेज़ और सटीक ब्योरे पर भरोसा करने वाले गद्य से उन्होंने जासूसी कथा को तर्क के इर्द-गिर्द बुना हुआ एक टिकाऊ ढाँचा दिया। पहले विश्वयुद्ध के अंत में बेटे और भाई को खोने के बाद उन्होंने बचा हुआ जीवन प्रेतवाद के प्रचार को दिया, जिसमें उनकी रुचि बरसों पुरानी थी। 7 जुलाई 1930 को क्रोबरो स्थित अपने घर में उनका देहांत हुआ।
डॉयल ने विक्टोरिया युग के अंतिम तीस वर्षों में लिखा, उस ब्रिटेन में जो तेज़ी से औद्योगिक हो रहा था और अपने साम्राज्य के शिखर पर था। सस्ती मासिक पत्रिकाओं ने विशाल पाठक वर्ग बना दिया था और धारावाहिक कथा लोकप्रिय साहित्य का इंजन थी। यह विरोधाभासों का समय था: वैज्ञानिक विवेक से हर समस्या के हल की आशा थी, और साथ ही प्रेतगोष्ठियाँ बैठकों को भरे रखती थीं। बोअर युद्ध ने साम्राज्य के गर्व को हिलाया, और पो तथा गाबोरिओ के बाद जासूसी कथा अपने नियमों वाली एक विधा बनती जा रही थी।