
Fyodor Dostoyevski
‘द इडियट’ (मूर्ख) अरबी मूल का एक शब्द है जिसका उपयोग आमतौर पर उन लोगों के लिए किया जाता है जो मानसिक रूप से कमजोर, मूर्ख या भोलापन की हद तक सीधे-सादे होते हैं। यह शब्द फ्योदोर मिखाइलोविच दोस्तोयेवस्की की प्रसिद्ध कृति का शीर्षक भी है, जो विश्व साहित्य की उत्कृष्ट कृतियों में से एक है।
पूर्णतः निष्कपट, मासूम, दयालु और ईसा मसीह के समान 'भले इंसान' प्रिंस मिश्किन का उस पीटर्सबर्ग के उच्च समाज में प्रवेश, जहां दंभ, धन, वासना और सामाजिक पाखंड हावी हैं, और इससे उत्पन्न होने वाला दुखद अंतर्विरोध। दो अलग-अलग प्रकार के प्रेम (मिश्किन का करुणा-आधारित ईसाई प्रेम और रोगोज़िन का अधिकारवादी, उन्मादी प्रेम) के बीच फंसी नस्तास्या फ़िलिपोव्ना द्वारा निर्मित विनाशकारी भंवर, जो अंततः महाविनाश में बदल जाता है।
रूसी साम्राज्य; मुख्य रूप से धुंधला, उदास सेंट पीटर्सबर्ग शहर का केंद्र और ग्रीष्मकालीन आवासों वाला अपेक्षाकृत हरा-भरा, परंतु अफ़वाहों से भरा पावलोवस्क क़स्बा।
19वीं शताब्दी का मध्य (नवंबर में प्रारंभ होकर ग्रीष्मकाल के मध्य तक चलने वाला समय)।
तनावपूर्ण, उदासी भरा, गाहे-बगाहे उन्मादी और संकटों से परिपूर्ण; तीव्र मनोदशा के उतार-चढ़ावों, मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल और सामाजिक पतन का परस्पर गुंथा हुआ एक सघन वातावरण। पात्रों का आंतरिक संघर्ष अंधेरे कमरों और आधी रातों में एक रहस्यमय व भयावह रूप ले लेता है।
अक्सर पात्रों के अंतर्मन में झांकने वाला, बीच-बीच में दार्शनिक, सामाजिक या व्यंग्यात्मक टिप्पणियां करने वाला और पाठक से सीधे संवाद साधने वाला एक सूक्ष्मदर्शी अन्य-पुरुष (थर्ड-पर्सन) नैरेटर।
सामाजिक हैसियत, धन, पदवियां और वैवाहिक गठबंधन हर चीज़ के केंद्र में हैं। गपशप, षड्यंत्र और प्रतिष्ठा ही लोगों का भाग्य तय करते हैं। इस संसार में मासूमियत, निःस्वार्थ करुणा और ईमानदारी को एक रुग्ण 'मूर्खता' समझा जाता है, जिसका आमतौर पर उपहास उड़ाया जाता है या अनुचित लाभ उठाया जाता है।
भू-दासता (सर्फ़डम) के उन्मूलन के बाद बदलते वर्ग-संरचना का दौर, जहां सूदखोरी और बुर्जुआ मूल्य कुलीन मूल्यों से टकराते हैं; ज्ञानोदय और शून्यवाद पारंपरिक रूसी ईसाई मूल्यों से संघर्षरत हैं, और कुलीन वर्ग भी धन के लालच से प्रेरित होने लगा है। यह एक ऐसा संक्रमणकालीन रूस है जहां युवा नए और कट्टरपंथी विचारों की चपेट में हैं और आस्था के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं।
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मिश्किन उसके प्रति असीम करुणा और सहानुभूति का भाव रखते हैं, उसे उबारना और सम्मान देना चाहते हैं। नस्तास्या हालांकि प्रिंस की पवित्रता की कद्र करती है, फिर भी वह मानती है कि उसका अपना 'कलंकित जीवन' प्रिंस को बर्बाद कर देगा; इसलिए वह लगातार उनसे दूर भागती है और स्वयं अपने विनाश का मार्ग चुनती है।
नस्तास्या का यह कहकर प्रिंस को छोड़ देना और रोगोज़िन के साथ भाग जाना कि 'मैं तुम्हारे जैसे फरिश्ते को बर्बाद नहीं कर सकती।'
वे अपने क्रॉस बदलकर धर्म-भाई बन जाते हैं, किंतु नस्तास्या फ़िलिपोव्ना के प्रति अपने परस्पर विरोधी प्रेम (करुणा बनाम जुनूनी अधिकार-भाव) के कारण निरंतर जीवन-मरण के संघर्ष में उलझे रहते हैं। रोगोज़िन प्रिंस की नैतिक श्रेष्ठता से नफ़रत भी करता है और उसका गहरा सम्मान भी करता है।
होटल के एक अंधेरे गलियारे में रोगोज़िन द्वारा प्रिंस पर चाकू से हमला करने का प्रयास, लेकिन प्रिंस को मिर्गी का दौरा पड़ते देख भयभीत होकर उसका भाग जाना।
अग्लया प्रिंस की मासूमियत और निष्कपटता को पसंद करती है, और उन्हें 'दीन शूरवीर' (पुअर नाइट) के रूप में आदर्श मानती है। हालांकि, समाज में प्रिंस का अनाड़ीपन और नस्तास्या के प्रति उनकी एकतरफ़ा करुणा अग्लया को क्रोधित कर देती है, जिससे उनके बीच लगातार संवादहीनता और तल्खी बनी रहती है।
अग्लया का प्रिंस को गुप्त पत्र देकर पार्क में मिलने बुलाना, परंतु मिलने पर उनका उपहास उड़ाना।
एक-दूसरे को पूरी तरह नष्ट कर देने वाला एक स्याह और अस्वस्थ आकर्षण। नस्तास्या प्रिंस को कलंकित होने से बचाने के लिए खुद को दंडित करते हुए रोगोज़िन के पास जाती है, यद्यपि वह जानती है कि रोगोज़िन उसकी हत्या कर देगा और वह उससे डरती भी है। रोगोज़िन उसे पाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देता है, लेकिन वह यह भी जानता है कि नस्तास्या मन ही मन उसे तुच्छ समझती है।
विवाह से ठीक पहले नस्तास्या का प्रिंस को छोड़कर भीड़ के बीच से रोगोज़िन की बग्गी की ओर दौड़ना और चिल्लाना, 'मुझे यहाँ से ले चलो!'
गान्या प्रिंस की अंतर्दृष्टि और सरलता से असहज महसूस करता है, क्योंकि प्रिंस उसकी महत्वाकांक्षाओं और कमजोरियों को आसानी से भांप लेते हैं। गान्या पहले प्रिंस को मूर्ख समझकर उनका इस्तेमाल करने की कोशिश करता है, किंतु बाद में अपने अहंकार से उपजी लज्जा के कारण उनसे घृणा करने लगता है।
गान्या का आपा खोकर प्रिंस के चेहरे पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारना और प्रिंस का शांत रहकर उसका जवाब देना।
गान्या केवल 75 हज़ार रूबल के दहेज के लिए नस्तास्या से विवाह करना चाहता है। नस्तास्या को गान्या का यह लालच और उसकी आत्मिक दुर्बलता घिनौनी लगती है, वह उसकी परीक्षा लेती है और सबके सामने उसे अपमानित करती है।
नस्तास्या का 1 लाख रूबल अंगीठी में फेंकना और गान्या से 'यदि हाथ जलाए बिना पैसे निकाल लो तो ये तुम्हारे हैं' कहकर उसके स्वाभिमान की परीक्षा लेना।
दोनों महिलाएँ प्रिंस से प्रेम करती हैं किंतु उसके प्रेम को आपस में बाँट नहीं सकतीं। नस्तास्या, अग्लया पर अपनी श्रेष्ठता और त्याग दर्शाने के लिए उसे प्रिंस से विवाह करने हेतु लगातार पत्र लिखती है। वहीं अग्लया, नस्तास्या के दंभी 'पतित स्त्री' के रूप से क्षुब्ध होकर उस पर प्रहार करती है।
अग्लया का नस्तास्या के घर जाकर उसे 'धृष्ट, पतित स्त्री' कहना और नस्तास्या का प्रतिशोधवश प्रिंस को अग्लया से छीन लेना।
लिज़ावेता प्रिंस का निष्कपट हृदय देखती है और उसमें अपनी ही सच्चाई पाकर उसे दत्तक पुत्र की भाँति अपने संरक्षण में ले लेती है। तथापि, प्रिंस की सामाजिक भूलें और 'पतित' व्यक्तियों से उसके संबंध उसे निरंतर क्रोधित करते रहते हैं।
प्रिंस द्वारा गुलदस्ता तोड़े जाने वाले जलसे के उपरांत, लिज़ावेता का उस पर तरस भी खाना और अपने क्रोध के बावजूद उसका बचाव करने का प्रयास करना।
मृत्युशैया पर पड़ा इप्पोलित, प्रिंस के स्वास्थ्य, सदाचार और आत्मिक शांति के प्रति गहरी शत्रुता और ईर्ष्या रखता है। वहीं प्रिंस, इप्पोलित की वेदना और छटपटाहट पर दया भाव रखता है।
इप्पोलित का सभी अतिथियों के समक्ष अपना लंबा और विद्रोही दार्शनिक स्वीकारोक्ति पत्र पढ़ना, फिर आत्महत्या का एक असफल प्रयास करना और अपनी लज्जा के लिए प्रिंस को दोषी ठहराना।
लेबेदेव अपने आर्थिक अथवा षड्यंत्रकारी स्वार्थों के लिए प्रिंस के भोलेपन का दोहन करता है, किंतु साथ ही वह प्रिंस की आत्मिक महानता के समक्ष क्षमा याचना करने वाला एक हास्यास्पद-दुखद चरित्र है। प्रिंस उसके पाखंड को जानता है, फिर भी उसे क्षमा कर देता है।
लेबेदेव का गुप्त रूप से अग्लया के पत्र को टटोलना और प्रिंस को अपने ही घर में गुप्त रूप से नियंत्रण में रखने का प्रयास करना।
गान्या अपनी प्रतिष्ठा और महत्वाकांक्षा के कारण अग्लया में रुचि लेता है और उससे संपर्क बनाए रखने का प्रयास करता है। वहीं अग्लया गान्या की दुर्बलताओं को भली-भाँति समझती है, उसे केवल एक संदेशवाहक अथवा प्रिंस को चिढ़ाने का साधन मानकर उसका तिरस्कार करती है।
अग्लया का गान्या द्वारा लाई गई गुप्त पर्ची को उपेक्षापूर्वक लेना और तत्पश्चात प्रिंस को भड़काने के लिए उसे एक खेल की भाँति उपयोग करना।