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उनका जन्म 1866 में इस्तांबुल के एयूप मुहल्ले में हुआ; परिवार उशाक से आया व्यापारी घराना था। पिता हालिल एफ़ेंदी क़ालीनों का कारोबार करते थे, माँ का नाम बेहिये हानिम था। मेरजान की मुहल्ला पाठशाला के बाद उन्होंने फ़ातिह के सैनिक मिडिल स्कूल में दाख़िला लिया। 1877-78 के युद्ध ने घर का कारोबार हिला दिया तो 1878 में परिवार इज़मिर चला गया; पढ़ाई वहीं पूरी हुई और मेख़ितारिस्त स्कूल में फ़्रांसीसी सीखते ही फ़्रांसीसी उपन्यास उनके सामने खुल गया।
बीस पार की उम्र में वे इज़मिर में फ़्रांसीसी पढ़ाते और ओटोमन बैंक की वहीं की शाखा में काम करते हुए लिखने लगे। 1884 में मित्रों के साथ ‘नेवरूज़’ पत्रिका और 1886 में तेवफ़िक नेवज़ात के साथ ‘हिज़मेत’ अख़बार निकाला, जिसमें उनके पहले उपन्यास धारावाहिक छपे। 1893 में वे इस्तांबुल आ गए और तंबाकू प्रशासन में नौकरी शुरू की, जो सोलह बरस चली।
अपनी असली आवाज़ उन्हें 1896 में ‘सर्वेत-ए फ़ुनून’ की मंडली में शामिल होने के बाद मिली। ‘नीला और काला’ में उन्होंने उस युवक की कथा कही जो कवि बनना चाहता था और अपने सपनों को बिखरते देखता रहा; ‘निषिद्ध प्रेम’ में बोस्फ़ोरस किनारे की एक हवेली में कसती हुई वर्जित आसक्ति को लिखा। 1901 में सेंसर ने पत्रिका को चुप करा दिया और मंडली बिखर गई। संवैधानिक क्रांति के बाद उन्होंने दारुलफ़ुनून में पढ़ाया और 1909 से 1912 तक सुल्तान रेशाद के प्रधान सचिव रहे। पिछले वर्ष येशिलक्योय में संस्मरण लिखते बीते; 1937 में बेटे वेदात की तिराना में आत्महत्या ने उन्हें तोड़ दिया।
लंबे, गुँथे हुए वाक्यों और भारी शब्दावली के साथ उन्होंने तुर्की उपन्यास को भीतर देखने की ऐसी गहराई दी जो उसके पास न थी, और कथानक पश्चिमी उपन्यास के माप पर गढ़ा। अंतिम वर्षों में उन्होंने नए पाठक के लिए अपनी ही किताबों की भाषा सरल कर दी। 27 मार्च 1945 को येशिलक्योय में उनका देहांत हुआ।
उन्होंने अब्दुलहमीद द्वितीय के सेंसर के नीचे, उन वर्षों में लिखा जब राजनीति को साहित्य से बाहर धकेल दिया गया था। तंज़ीमात पीढ़ी उपन्यास को जनता को शिक्षित करने का साधन मानती थी, जबकि ‘सर्वेत-ए फ़ुनून’ के लेखकों ने भाषा, रूप और व्यक्ति के भीतरी जीवन को आगे रखा; इसी कारण उन पर कला के लिए कला करने और तुर्की को पराया बनाने के आरोप लगे। पश्चिमी उपन्यास की तकनीकें भाषा में तभी आ रही थीं, और उन्होंने उपन्यास को एक शिल्प की तरह खड़ा करने का काम अपने ऊपर लिया।