
Platon
प्लेटो की कृति 'सोक्रतीस का क्षमायाचना' (Apology) 399 ईसा पूर्व में एथेंस के लोकतंत्र द्वारा उनके गुरु सोक्रतीस पर चलाए गए मुकदमे से संबंधित है। उन पर युवाओं को भ्रष्ट करने और शहर में नए देवताओं को लाने का आरोप लगाया गया था। यह सम्मान का एक घोषणापत्र है जहाँ एक प्रतिवादी दया की भीख माँगने के बजाय अपने दार्शनिक सिद्धांतों की रक्षा के लिए मृत्यु को चुनौती देता है।
सुकरात की सत्य की अडिग खोज, तर्क और नैतिक मूल्यों तथा एथेंस के समाज के रूढ़िवादी विश्वासों, पूर्वाग्रहों और राजनीतिक अहंकार के बीच का संघर्ष। सुकरात द्वारा कानूनों का पालन करने का चयन करने के साथ, शारीरिक अस्तित्व और दार्शनिक/आध्यात्मिक आदर्शों के बीच का विरोधाभास केंद्र में है।
प्राचीन एथेंस (स्टोआ बेसिलीओस / राजा का दालान, न्यायालय कक्ष और वह कारागार जहाँ सुकरात ने अपने अंतिम दिन बिताए)।
399 ईसा पूर्व (वह वर्ष जब सुकरात पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें मृत्युदंड दिया गया)।
एक तनावपूर्ण अदालती कार्यवाही और मृत्यु की कगार पर खड़े कारागार का उदास किंतु गहरा दार्शनिक शांत दोहरा वातावरण। एक बौद्धिक रूप से गंभीर परिवेश जहाँ मृत्यु का भय तार्किक स्वीकार्यता और शांत आशा में परिवर्तित हो जाता है।
रचनाएँ संवाद शैली में हैं। 'सुकरात का बयान' (अपोलॉजी) सीधे तौर पर सुकरात का उत्तम पुरुष में दिया गया एकालाप और जिरह है। वहीं 'फाइडो' (फेडो) संवाद फाइडो द्वारा एखेक्रेटेस को सुकरात के अंतिम पलों का उत्तम पुरुष बाह्य दृष्टा के रूप में सुनाए जाने वाले एक कथा-ढांचे पर आधारित है।
प्राचीन एथेंस के कानून और लोकतंत्र के नियम लागू हैं। अदालतें लॉटरी द्वारा चुने गए सैकड़ों सदस्यों (न्यायाधीशों के समूह) से बनती हैं और आरोप व्यक्तियों द्वारा लगाए जाते हैं। निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं। तत्कालीन यूनानी सोच में, देवताओं (नगर-राज्य द्वारा मान्य देवताओं) पर विश्वास न करना एक बड़ा अपराध है। दर्शन और सोफिस्ट वाद-विवाद नगर के बौद्धिक जीवन को दिशा देने के साथ-साथ आम जनमानस में संदेह की दृष्टि से देखे जाते हैं।
पेलोपोनेशियाई युद्ध के बाद के विनाश और तीस अत्याचारियों (थर्टी टायरेंट्स) के क्रूर शासन के उपरांत पुनर्गठित एथेनियन लोकतंत्र का काल। समाज नैतिक संकट के दौर से गुजर रहा है, और पुरातन तथा पारंपरिक धार्मिकता की ओर लौटने की प्रवृत्ति प्रबल है। यह एक संक्रमण काल है जहाँ सोफिस्टों के सापेक्षतावाद और सुकरात की परम सत्य की खोज के बीच टकराव होता है।
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सुकरात सुकराती व्यंग्य (आयरनी) और जिरह के माध्यम से यूथीफ्रो के धर्मपरायणता संबंधी घमंड और अज्ञानता का क्रमवार खंडन करते हैं। दोनों के बीच शक्ति का संतुलन यूथीफ्रो के अति-आत्मविश्वास से शुरू होकर सुकरात के तार्किक वर्चस्व हासिल करने के साथ बदल जाता है।
सुकरात द्वारा अपने पिता पर मुकदमा चलाने वाले यूथीफ्रो से 'धर्मपरायणता' की सटीक परिभाषा मांगना और उसके हर उत्तर को द्वंद्वात्मक पद्धति से निष्प्रभावी कर देना।
मेलेटस सुकरात के प्रति द्वेष रखने वाले और उन पर समाज की नींव को खोखला करने का आरोप लगाने वाले वर्ग का एक उथला प्रतिनिधि है। वहीं सुकरात अदालत में मेलेटस से जिरह करके उसके आरोपों की तार्किक त्रुटियों और दार्शनिक अज्ञानता को उजागर करते हैं तथा उसे निरुत्तर कर देते हैं।
सुकरात द्वारा अदालत में मेलेटस से यह पूछना कि युवाओं को कौन सुधारता है, और मेलेटस का 'कानून और न्यायाधीश' कहकर स्वयं को विरोधाभास में फंसा लेना।
क्रिटो सुकरात से गहरे प्रेम और व्यावहारिक निष्ठा से जुड़ा हुआ है। वह उनका जीवन बचाने के लिए रिश्वत देने और उन्हें भगाने का प्रस्ताव रखता है। सुकरात उसके स्नेहपूर्ण दृष्टिकोण की सराहना करते हुए भी नैतिक और कानूनी तर्कों से क्रिटो के दृष्टिकोण का समाधान करते हैं और उसे मना लेते हैं।
क्रिटो का कालकोठरी में सो रहे सुकरात को ममतावश न जगाना और उसके बाद उन्हें भागने की योजना बताते हुए दिया गया उसका भावुक भाषण।
फाइडो अपने गुरु के प्रति असीम सम्मान और श्रद्धा रखता है। सुकरात की मृत्यु के सामने वह गहरा दुख भी महसूस करता है और उनके दार्शनिक धैर्य के कारण अवर्णनीय विस्मय का अनुभव भी करता है। दोनों के बीच एक स्नेहपूर्ण गुरु-शिष्य संबंध है।
फाइडो द्वारा यह बताना कि सुकरात के अंतिम दिन वह उनके कंधों पर बिखरे बालों से खेल रहा था और उनकी मृत्यु के सामने स्वयं को रोने से रोकने के लिए संघर्ष कर रहा था।
सिमियास आत्मा की अमरता के सुकरात के तर्कों पर बुद्धिमत्तापूर्ण आपत्तियां उठाने वाला, सम्मानजनक किंतु आसानी से संतुष्ट न होने वाला दार्शनिक है। सुकरात उसकी 'आत्मा एक सामंजस्य (हार्मनी) है' संबंधी सशक्त आपत्ति का सहर्ष स्वागत करते हैं और चर्चा को और गहरा करते हैं।
सिमियास द्वारा आत्मा की तुलना वीणा (लायर) के सामंजस्य से करते हुए यह दावा करना कि शरीर की मृत्यु के बाद आत्मा शेष नहीं रह सकती, और सुकरात द्वारा इसका खंडन करना।
केबीज़, सिम्मियास के साथ सुकरात का सबसे चुनौतीपूर्ण और आलोचनात्मक संवाद-साथी है। वह लगातार ठोस प्रमाण की माँग करता है और यह संदेह व्यक्त करता है कि भले ही आत्मा कई शरीरों को घिसकर नष्ट कर दे, फिर भी अंततः वह स्वयं नष्ट हो सकती है। सुकरात उसे समझाने के लिए अवधारणाओं की मूल प्रकृति में उतरते हैं।
केबीज़ द्वारा बुनकर और उसके द्वारा घिसे गए कपड़ों का रूपक प्रस्तुत करके सुकरात के अमरता के सिद्धांत को चुनौती देना।
एखेक्रेटेस सुकरात के अंतिम क्षणों को जानने के लिए एक उत्सुक श्रोता है; जबकि फ़ाइडो इस घटना को विस्तार से सुनाने वाला एक विश्वसनीय स्रोत है। वे दोनों एक साझा भावनात्मक धरातल पर मिलते हैं।
एखेक्रेटेस का अनुरोध: 'तुम्हें सुनने वाले हम सभी भी उन्हीं भावनाओं से भरे हैं फ़ाइडो, सब कुछ विस्तार से बताओ।'
पारंपरिक, अत्यधिक भावुक और साधारण स्त्री ज़ैंथिप्पी, दार्शनिक शांत-चित्तता को अपनाने वाले अपने पति सुकरात के ठीक विपरीत स्वभाव की है। सुकरात मृत्यु के सम्मुख उसके विलाप को अत्यधिक मानते हैं और उसे बाहर भिजवा देते हैं।
कारागार में ज़ैंथिप्पी के बाल नोच-नोच कर रोने पर सुकरात का क्रिटो से उसे घर ले जाने का अनुरोध करना।