
Lev Tolstoy
लियो टॉल्स्टॉय की 'इवान इलिच की मृत्यु' एक उच्च-स्तरीय न्यायाधीश की कहानी है, जो एक लाइलाज बीमारी के बाद मृत्यु के साथ एक गहन आंतरिक सामना करता है, और सामाजिक मानदंडों के अनुसार जिए गए एक सामान्य, कृत्रिम जीवन पर चिंतन करता है।
इवान इल्यिच द्वारा जीए गए समाज-प्रेरित उथले, भौतिकवादी, पद-प्रतिष्ठा-केंद्रित जीवन और अचानक उनके सामने आ खड़ी हुई निर्मम व अनिवार्य मृत्यु की वास्तविकता के बीच का द्वंद्व। इस बाह्य क्षरण और झूठी सहानुभूति के बीच, उनकी आत्मा की गहराइयों में उठने वाला यह प्रश्न कि 'क्या मैंने वैसा जीवन नहीं जिया जैसा मुझे जीना चाहिए था?' और मृत्यु पर विजय पाने का उनका प्रयास ही मुख्य द्वंद्व का निर्माण करता है।
ज़ारशाही रूस। सेंट पीटर्सबर्ग, विभिन्न प्रांतीय केंद्र और मुख्य रूप से इवान इलिच का वह घर जिसे उसने बड़ी सावधानी और महत्वाकांक्षा के साथ सजाया था।
19वीं सदी की अंतिम तिमाही (कहानी फरवरी 1882 की मृत्यु की घोषणा के साथ शुरू होती है और उससे पहले के समय तक जाती है)।
कहानी का परिवेश उदास, भारी, दमघोंटू और अत्यंत बनावटी है। इवान इल्यिच का भव्य और सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाया गया घर, उनकी बीमारी के साथ ही एक संकरी, अंधेरी जेल और एक कब्र में तब्दील हो जाता है। यहाँ एक औपचारिक और ठंडी मृत्यु/रोग का माहौल व्याप्त है, जहाँ हर कोई एक-दूसरे से झूठ बोलता है और वास्तविक भावनाओं को छिपाया जाता है।
सर्वज्ञ (ऑम्निशिएंट) तृतीय पुरुष वस्तुनिष्ठ कथावाचक, जो सब कुछ जानता है, कथा के भीतर प्रवेश करता है और पात्रों के अंतर्मन पर पूर्ण अधिकार रखता है। कथावाचक प्रायः एक आलोचनात्मक लहजे में पात्रों के पाखंड और विडंबनापूर्ण स्थितियों को उजागर करता है।
रचे गए संसार में अभिजात्य वर्ग की नकल करने वाले नौकरशाही संभ्रांत वर्ग के औपचारिक नियम लागू होते हैं। लोग एक-दूसरे का मूल्यांकन भावनाओं से नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिति से करते हैं। शिष्टाचार, शालीनता और 'सभ्य' दिखना सबसे बड़ा गुण माना जाता है, जबकि आत्मीयता, बीमारी, मृत्यु या पीड़ा को केवल दबाने या अनदेखा करने योग्य असुविधाजनक विवरण माना जाता है। रोना या कमजोरी के लक्षण दिखाना 'अशोभनीय' समझा जाता है।
उस दौर के पद-प्रतिष्ठा के आकांक्षी और पश्चिमीकरण की होड़ में लगे रूसी नौकरशाह/अधिकारी उच्च-मध्यम वर्ग के सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंड हावी हैं। फ्रांसीसी शब्दों का प्रयोग करना, सारा बर्नहार्ट के नाटकों को देखना, महंगे फर्नीचर खरीदकर 'अमीरों जैसा दिखने की कोशिश करना' इस वर्ग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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उनके विवाह की शुरुआत में जो आकर्षण था, उसने शीघ्र ही परस्पर असहनीयता और स्वार्थ के ठंडे संघर्ष का रूप ले लिया। जब इवान बीमार पड़ते हैं, तो उनकी पत्नी इस बीमारी को पति की ज़िद बताकर शिकायत करती है; मन ही मन वह उनके जल्द मर जाने की कामना करती है, किंतु पेंशन/वेतन बंद हो जाने के डर से वह पूरी तरह ऐसा भी नहीं चाहती।
उसने मान लिया था कि उसका पति एक बुरे स्वभाव वाला, मुसीबत पैदा करने वाला आदमी है; वह खुद पर तरस खाने लगी, पति से नफरत करने लगी और उसकी मौत चाहने लगी। पर वह पूरी तरह यह भी नहीं चाहती थी, क्योंकि तब वेतन मिलना बंद हो जाता।
घर के पाखंड के बीच गेरासिम ही एकमात्र सच्चा संबंध है। गेरासिम इवान इल्यिच की बीमारी या उनसे आने वाली दुर्गंध से घिन नहीं करता। वह झूठ नहीं बोलता और नश्वरता को स्वाभाविक मानता है, इसलिए उनके बीच का संबंध एक पीड़ित आत्मा और एक सच्चे हृदय का पावन स्पर्श बन जाता है।
केवल गेरासिम ही था जो झूठ नहीं बोलता था। यह स्पष्ट था कि केवल वही मामले की असलियत समझता था, उसे इसे छिपाने की कोई ज़रूरत नहीं लगती थी और वह अपने क्षीण होते मालिक पर खुलकर दया दिखाता था।
यद्यपि समाज की नजर में वे 'घनिष्ठ मित्र' हैं, परंतु यह संबंध भावनाओं के बजाय आदतों पर टिका है। मृत्यु की खबर मिलने पर उनके बीच केवल अंतिम संस्कार की औपचारिकता और पद हथियाने के गणित की चिंता ही शेष रह जाती है।
प्योत्र इवानोविच मृतक के प्रावोवेदेनी स्कूल के ज़माने के दोस्त थे... लेकिन इस आसन्न मृत्यु ने उनके मन में यह विचार पैदा कर दिया कि इसका उनके तबादले या पदोन्नति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
परिवार में केवल उनका बेटा ही ऐसा है जो पिता की त्रासदी को स्वार्थ से नहीं बल्कि दिल से देखता है। दोनों के बीच एक मूक करुणा का संबंध है; इवान मृत्यु से ठीक पहले इसी बच्चे की निष्पाप लाचारी और स्नेह से ज्ञानोदय प्राप्त करते हैं।
उनका हाथ उस छोटे स्कूली लड़के के सिर से टकराया। बच्चे ने हाथ पकड़ लिया, अपने होठों से लगाया और रोने लगा।
एक ठंडा और टूटा हुआ संबंध। अपनी युवावस्था के उफान पर खड़ी बेटी के लिए पिता की मृत्यु केवल उसके सामाजिक जीवन, सगाई के दौर और थिएटर के आनंद में खलल डालने वाली एक कष्टप्रद बाधा मात्र है।
उनकी बेटी सज-धज कर, अपनी पूरी यौवनमयी देह के साथ कमरे में दाखिल हुई। जहाँ इवान इल्यिच का शरीर उन्हें असीम यातना दे रहा था, वहीं वह अपने शरीर का प्रदर्शन कर रही थी।
वे एक साथ मिलकर उस रस्म का नाटक खेलते हैं जिसके कोई लिखित नियम नहीं हैं। हालांकि वे एक विधवा के दुख और सबसे वफादार दोस्त की निष्ठा के माध्यम से एक दृश्य खड़ा करते हैं, लेकिन उनका असली सरोकार पेंशन या उन ताश की पार्टियों से है जिन्हें वे छोड़ना नहीं चाहते।
बातचीत के दौरान उसने उन चीजों का भी जिक्र किया जिन्हें वह प्योत्र इवानोविच के साथ सुलझाना चाहती थी। वह जानना चाहती थी कि अपने पति की मृत्यु पर वह सरकार से पैसे कैसे प्राप्त कर सकती है।
वे मृत्यु की शीतलता के विपरीत अभिजात वर्ग के मेलजोल के हल्केपन का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्वार्ट्ज का सहज व्यवहार प्योत्र को माहौल की उदासी से बाहर निकलने और खेल (विंट) खेलने के लिए प्रोत्साहित करता है।
श्वार्ट्ज उसका इंतजार कर रहा था... उसका खड़ा होने का तरीका, उसकी उपस्थिति, यह कह रही थी कि 'इवान इलिच का शोक समारोह, स्थिति के सामान्य क्रम को बिगाड़ने के लिए पर्याप्त कारण नहीं है।'
शक्ति और निर्णय पर केंद्रित एक पाखंडी संबंध। डॉक्टर, ठीक उसी तरह जैसे इवान इलिच अदालत में प्रतिवादियों के साथ व्यवहार करता था, अपने रोगी को तुच्छ समझता है, और औपचारिक झूठ के जरिए उसे 'मृत्यु' की वास्तविक समस्या से दूर रखता है।
सब कुछ बिल्कुल वैसा ही था जैसे इवान इलिच अदालत में प्रतिवादियों के साथ बड़ी कुशलता से पेश आता था। डॉक्टर ने भी उतनी ही सफलता से अपना 'तर्कपूर्ण निर्णय' संक्षेप में सुनाया; उसने चश्मे के ऊपर से 'प्रतिवादी' को विजयी नजरों से देखा।
पिता की सनक और घर में छाई बीमारी के माहौल से थक चुकी दो महिलाओं द्वारा बनाया गया एक व्यावहारिक गठबंधन। वे दोनों इस मृत्यु को एक अन्याय और खुद को दी गई सजा मानती हैं।
लिज़ा ने अपनी माँ से दूरबीन मांगी। माँ और बेटी के बीच इस बात पर हल्की बहस हुई कि उन्होंने दूरबीन कहाँ रखी है।
युवावस्था, स्वास्थ्य और सांसारिक आनंद से पोषित एक आधुनिक, सतही जुनून। एक तरफ मृत्यु का सत्य है, जबकि उनकी लापरवाह युवावस्था मरते हुए व्यक्ति की त्रासदी के साथ एक कड़वा विरोधाभास पैदा करती है।
फ्रॉक कोट पहने, बाल संवारे हुए; सफेद कॉलर से कसी हुई... फेदोर दिमित्रीविच भी अपने हाथ में सिलेंडर हैट लिए अंदर आया।