
Victor Hugo
विक्टर ह्यूगो की प्रसिद्ध कृति 'ले मिज़रेबल', जो 1862 में प्रकाशित हुई थी, 19वीं सदी के फ्रांस पर आधारित एक विशाल ऐतिहासिक उपन्यास है। यह गरीबी, न्याय, अंतरात्मा और पश्चाताप जैसे विषयों की पड़ताल करता है। यह उन सामाजिक अन्यायों की आलोचना करता है जिन्हें ज्यां वालज़ान के संघर्षों के माध्यम से दिखाया गया है, जिसने रोटी का एक टुकड़ा चुराने के लिए 19 साल की कड़ी सजा काटी थी, और जो इंस्पेक्टर जावेर द्वारा पीछा किए जाने के दौरान समाज में फिर से घुलने-मिलने का प्रयास करता है।
अतीत में एक रोटी चुराने के कारण बर्बाद हुए और समाज द्वारा बहिष्कृत पूर्व कैदी ज्याँ वालझाँ (मेयर मदलेन) का, नेक बनकर अच्छाई फैलाने के प्रयास में, कानून के कठोर व निर्दयी प्रतिनिधि जावेर के साथ निरंतर चलने वाला चूहे-बिल्ली का खेल। वालझाँ का अपनी सुख-शांति के लिए किसी निर्दोष की सजा की उपेक्षा करने और अपना जीवन बलिदान कर नैतिक शुद्धि प्राप्त करने के बीच का आंतरिक द्वंद्व।
फ्रांस; बिशप का पर्वतीय नगर दीन्य, महाशय मादलेन द्वारा समृद्ध बनाया गया मोंत्रोई-सुर-मेर, गरीबी और शोषण का केंद्र मोंतफेर्मेई के जंगल, आरास की सत्र अदालत, तूलों की जेल और वाटरलू का युद्धक्षेत्र।
19वीं सदी की शुरुआत (1815 से 1823 तक का कालखंड और 1815 के ऐतिहासिक वाटरलू के युद्ध का समय)।
एक अंधकारमय, घुटन भरे, भ्रष्ट और अन्यायपूर्ण संसार में आशा, आत्मिक मुक्ति और करुणा की किरणों से आलोकित एक उदास, महाकाव्यात्मक और ऐतिहासिक वातावरण।
घटनाओं को सर्वदर्शी दृष्टिकोण से देखने वाला, समाज, दर्शन, धर्म और इतिहास पर विस्तृत मीमांसा करने वाला, सर्वज्ञ, कहानी में हस्तक्षेप करने को अपना अधिकार मानने वाला और सीधे पाठक को संबोधित करने वाला अन्य-पुरुष (थर्ड-पर्सन) कथावाचक।
समाज के अपराध और न्याय संबंधी नियम अनम्य और क्रूर हैं; व्यवस्था को इस बात की कोई परवाह नहीं कि लोग गलती की ओर कैसे धकेले गए या वे कितने पश्चाताप में हैं। कानून जिस व्यक्ति पर एक बार कलंक लगा देता है, उसे उबारने के बजाय और गहरे अंधकार में धकेल देता है। किंतु सामाजिक वर्गों और राजकीय नियमों के पतन वाले इस संसार में, वास्तविक मुक्ति केवल व्यक्तियों द्वारा एक-दूसरे के प्रति दिखाई गई ईश्वरीय स्तर की करुणा, त्याग और अंतरात्मा की आवाज से ही संभव है।
फ्रांसीसी क्रांति के बाद की उथल-पुथल, नेपोलियन के युद्धों और क्रांतिकारी विचारों व राजतंत्रीय पुनर्स्थापना शासन (लुई अट्ठारहवें के अधीन) के बीच संघर्ष का एक अराजक संक्रमण काल। एक ऐसा परिवेश जहाँ निर्धन जनता और श्रमिक वर्ग भीषण आर्थिक संकट में पिस रहे हैं, और धार्मिक व वर्गीय रूढ़ियों के तले महिलाओं को हेय दृष्टि से देखा जाता है।
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बिशप समाज की तमाम घृणा के बावजूद वालझाँ को बिना किसी सवाल के निस्वार्थ प्रेम के साथ स्वीकार करते हैं। उनकी यह निष्काम भलाई वालझाँ के भीतर स्वयं के प्रति भरी नफ़रत को मिटा देती है और उसके जीवन को एक दिव्य दिशा प्रदान करती है।
बिशप का उसे सिपाहियों से बचाते हुए यह कहना: 'इस चाँदी से मैंने तुम्हारी आत्मा को खरीद लिया है और इसे अच्छाई को समर्पित कर दिया है।'
जावेर कानून और अंध अनुशासन का अथक, निष्ठावान सेवक है; वहीं वालझाँ करुणा और आत्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक है। जावेर, वालझाँ के सद्गुणों पर विश्वास करने से इनकार करते हुए उसे निरंतर पतन के कगार की ओर धकेलता है।
जावेर का नगर प्रमुख के कार्यालय में आकर यह बताना कि उसने पेरिस को सूचना दे दी है कि मदलेन ही वह पुराना कैदी है, और उसके सामने झुकने से इनकार कर देना।
एक पवित्र और निस्वार्थ बंधन। फांतीन दूर रहकर भी अपनी बेटी का पालन-पोषण करने और कड़ाके की ठंड में उसे गर्म रखने के लिए अपनी पवित्रता, स्वास्थ्य, देह और जीवन का अंधाधुंध बलिदान कर देती है।
फांतीन द्वारा कोज़ेट के लिए मोज़े, खिलौने और गर्म कपड़े खरीदने हेतु क्रमशः अपने बाल, दाँत और अंततः अपनी देह बेच देना।
मैडम थेनार्दिये कोज़ेट को एक वस्तु और दासी समझती हैं, और अपनी बेटियों को दी जाने वाली सभी सुख-सुविधाओं से उसे वंचित रखकर उस पर अत्याचार करती हैं। कोज़ेट विवश होकर सदा अत्यधिक आज्ञाकारिता और शांत भय के साथ अपनी स्वामिनी से बचने का प्रयास करती है।
कड़ाके की ठंड और आधी रात के घोर अंधकार में सराय की मालकिन द्वारा कोज़ेट को डरा-धमकाकर जबरन जंगल में पानी भरने भेजना।
मैडम जहाँ क्रूरता और घृणा को क्रियान्वित करने वाला पाशविक बल हैं, वहीं उनका पति मोन्स्योर थेनार्दिये कुटिल योजनाएँ बनाने और ग्राहकों को लूटने वाला शातिर दिमाग है। स्त्री भारी-भरकम और क्रोधी होने के बावजूद अपने पति के धूर्त अधिकार के आगे शांत हो जाती है।
कोज़ेट को एक अमीर अजनबी द्वारा गुड़िया भेंट किए जाने पर मैडम का ईर्ष्या से भर उठना, और पति द्वारा अपनी पत्नी को यह कहकर शांत कराना: 'यह सब पैसों के लिए है, वह भुगतान कर रहा है, चुप रहो।'
फांतीन अपने जीवन के पहले और सबसे पवित्र प्रेम के रूप में थोलोमिये को सब कुछ समर्पित कर देती है, जबकि उम्र में बड़े और स्वार्थी थोलोमिये के लिए फांतीन केवल गर्मियों का एक क्षणिक मनोरंजन मात्र है। यह एकतरफा, त्रासद लगाव है।
रविवार की सैर के बाद तोलोमिएस का अपने अन्य दोस्तों के साथ फोंतीन और अन्य लड़कियों के लिए एक व्यंग्यपूर्ण और घमंडी विदाई पत्र छोड़कर गायब हो जाना।
यदि शांपमाथ्यू को जेल भेज दिया जाता है, तो वालज्यां के सभी डर समाप्त हो जाएंगे और वह अपना समृद्ध जीवन जारी रख सकेगा; किंतु वालज्यां अपने मन में किसी अन्य के साथ अन्याय करने को अपनी ही आत्मा का पतन मानता है, और भाग्य का यह विरोधाभास उसे अपना अपराध स्वीकार करने की ओर धकेलता है।
आरास की अदालत में वालज्यां का सुनवाई के बीच पहुंचकर न्यायाधीश से यह कहना: 'उसे रिहा कर दीजिए, असली ज्यां वालज्यां मैं हूँ।'
शुरुआत में महाशय मादलेन से ईर्ष्या और द्वेष रखने वाला फोशलेवों, जब देखता है कि उस व्यक्ति ने अपनी जान जोखिम में डालकर गाड़ी को अपने कंधों पर उठाकर उसे निश्चित मौत से बचाया है, तो वह जीवन भर उसका ऋणी महसूस करता है।
कीचड़ में दबकर मरने की कगार पर पहुंचे फोशलेवों को भारी गाड़ी के नीचे से अकेले उठाने से पहले वालज्यां का बीस सोने के सिक्के देना और जब कोई आगे नहीं आया, तो खुद गाड़ी के नीचे घुस जाना।
जेल से समाज और प्रकृति के प्रति भारी क्रोध लेकर निकला वालज्यां, एक सहज और पाशविक प्रवृत्ति के तहत जेरवे के दो फ्रैंक चुरा लेता है। किंतु, अपने पुराने रूप में यह उसकी अंतिम बुराई साबित होती है और उसका पश्चाताप उसके आत्म-जागरण को जन्म देता है।
ठंडे और वीरान मैदान में वालज्यां का उस बच्चे पर चिल्लाना और उसे डराना, फिर अपनी नीचता का अहसास होते ही मैदान में बेबसी से बच्चे का नाम पुकारते हुए आंसू बहाना।
वालज्यां इस बेबस स्त्री के प्रति असीम दया रखता है, जिसे अनजाने में उसी की व्यवस्था ने नष्ट कर दिया था, और उससे क्षमा मांगता है। मृत्यु शय्या पर पड़ी इस स्त्री की एकमात्र इच्छा—उसकी बेटी की देखभाल करने—का वचन देकर वह उसके आध्यात्मिक पिता की भूमिका निभाता है।
जावेर के क्रूर हस्तक्षेप के कारण दम तोड़ती फोंतीन के सिरहाने झुककर वालज्यां का यह फुसफुसाना कि वह उसकी बेटी की रक्षा करेगा और उससे कोई प्रतिशोध नहीं लेगा।