
Cengiz Aytmatov
चिंगिज़ ऐतमातोव की इसी नाम की कृति में, 'सफेद जहाज़' एक छोटे लड़के की मासूमियत और उम्मीद का प्रतीक है, जो प्रेमहीनता और अत्याचार से बचने के लिए अपने सपनों की शरण लेता है। यह कृति एक दुखद उत्कृष्ट कृति है जो आधुनिकीकरण, परंपराओं के क्षरण और मानवता तथा प्रकृति के बीच के संघर्ष की पड़ताल करती है।
बच्चे की निष्कलंक, नैतिक और कल्पनाओं से भरी दुनिया तथा ओरोज़कुल द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली क्रूर, लालची और प्रेमहीन वास्तविक दुनिया के बीच का अपरिहार्य टकराव। यह द्वंद्व तब अपने चरम पर पहुँचता है जब फुर्तीला मोमिन अच्छाई और बुराई के बीच पिसकर घुटने टेक देता है।
चिंगिज़ ऐतमातोव के अनुसार किर्गिज़स्तान की सीमा में स्थित इसिक-कुल झील के निकट, बीहड़ पर्वतों और चीड़ के जंगलों से घिरी, केवल तीन परिवारों के बसेरे वाली वीरान सान-ताश घाटी।
20वीं सदी का मध्य, सोवियत संघ का काल (कोल्खोज़, सोवखोज़ और मैग्नीटोगोर्स्क के संदर्भों का दौर)।
एक उदास, अकेला, विषादपूर्ण और उत्तरोत्तर दमघोंटू वातावरण, जहाँ परियों की कहानियों और काव्यात्मक सौन्दर्य से परिपूर्ण प्रकृति, वयस्कों की क्रूर और भ्रष्ट दुनिया से टकराती है।
मुख्य रूप से 'बच्चे' के समृद्ध, पौराणिक और मासूम आंतरिक संसार से छनकर आने वाला, अन्य-पुरुष सर्वज्ञ कथावाचक; यत्र-तत्र पाठक को सीधे उपदेश (उदाहरणार्थ, हिरणी माँ की कथा के दौरान) देने वाली एक महाकाव्यात्मक शैली।
सान-ताश घाटी में जीवन मौसमों, प्रकृति की कठोर परिस्थितियों और वन-रक्षक ओरोज़कुल के दमनकारी नियमों के अनुसार चलता है। यहाँ एक क्रूर पदानुक्रम हावी है, जहाँ बलवान कमज़ोर को कुचलता है और स्वार्थ, किंवदंतियों व सद्गुणों पर भारी पड़ता है। तथापि बच्चे की दृष्टि में संसार, शिरालजिन घास, बादलों और हिरणी माँ के करुणामयी नियमों से भी बंधा है।
किर्गिज़ों की खानाबदोश और प्रकृति से जुड़ी सांस्कृतिक जड़ों व लोककथाओं (बुगू कबीले की कथा) का सोवियत व्यवस्था की नौकरशाही और स्वार्थी संरचना के साथ घालमेल; एक ऐसा संक्रमण काल जहाँ लोग अपने पूर्वजों के नाम और अपने अंतःकरण को भूलने लगे हैं।
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बच्चा अपने दादा के प्रति अगाध प्रेम और कृतज्ञता रखता है; दादा ही उसका एकमात्र संरक्षक और जीवन की इकलौती आशा हैं। किंतु ओरोज़कुल के सामने दादा की कायरता और अंततः किंवदंती (हिरणी माँ) के साथ उनका विश्वासघात, बच्चे के मन में एक अपूरणीय निराशा पैदा कर देता है।
बूढ़े ने अपना भारी, घट्टों भरा हाथ आहिस्ता से बच्चे के सिर पर रख दिया। बच्चे को अचानक लगा जैसे उसका गला रुँध गया हो।
ओरोज़कुल बच्चे को एक फालतू बोझ, अपनी बाँझ पत्नी और दयनीय ससुर का कूबड़ समझता है। वहीं बच्चा उससे ख़ौफ़ खाता है और उसके अत्याचारों के प्रति अपने बेबस क्रोध को कल्पनालोक में उसे सज़ा देकर दबाने की कोशिश करता है।
भाड़ में जाएँ ये पहाड़, ये जंगल... वह अक्ल का अंधा बुड्ढा, और वह टिटहरी जिसे उसने आँखों का तारा बनाकर चिपका रखा है!
ओरोज़कुल अधिकारी है और मोमिन एक वृद्ध कर्मचारी जो गुलाम की तरह खटता है। मोमिन अपनी बेटी बेकेई का घर न टूटे इसलिए ओरोज़कुल के हर अपमान, अन्याय और अत्याचार के आगे चुपचाप सिर झुकाए रहता है; अपने आत्मसम्मान और मान्यताओं को पैरों तले रौंद देता है।
ओरोज़कुल उसे इंसान ही नहीं समझता था, उसका अपमान करता और 'निकालता हूँ तुझे काम से!' कहकर उसे ज़लील करता था।
संतान न होने के कारण ओरोज़कुल लगातार अपनी पत्नी को कोसता है और शराब के नशे में उसे बेरहमी से पीटता है। बेकेई मौसी अपनी तकदीर से समझौता कर चुकी एक दुखी औरत है, जो मार खाने के बाद भी पति को शांत करने के लिए उसके आगे वोदका परोसती है।
वह आदमी उसे अधमरा होने तक पीटता था। मार खाने के बाद, वह उसके आगे आधा लीटर की एक और बोतल खिसका देती थी।
मोमिन अपनी बेटी के दुर्भाग्य पर अंदर ही अंदर घुटता है। बेटी बेसहारा न हो जाए और ससुराल से निकाल न दी जाए, इस ख़ातिर वह अपने पूरे जीवन के स्वाभिमान को ताक पर रखकर ओरोज़कुल की ग़ुलामी करता है।
मरने से पहले अगर वह उसे बड़ा कर पाता तो यह ख़ुशी उसके लिए काफ़ी होती... बेटी बाँझ थी, इसलिए वह सब कुछ बर्दाश्त कर रहा था।
सौतेली नानी बच्चे को अपने ख़ून से अलग एक 'पराया' समझती है। उसे बर्दाश्त करने की एकमात्र वजह उसका पति मोमिन है; वह लगातार बच्चे को डांटती-फटकारती है और ग़रीबी तथा बोझ का कारण मानकर उसके बस्ते व उसके अस्तित्व को सहन नहीं कर पाती।
उसकी नानी कहती थी कि वह एक पराया है, कुछ भी नहीं। पराए को चाहे जितना खिला-पिला लो, वह पराया ही रहता है।
नानी एक अधिकार जताने वाली और निष्ठुर स्त्री है, जो हर बात में दखल देती है, बड़बड़ाती रहती है, ओरोज़कुल के आगे अपने पति की अत्यधिक लाचारी व अधीनता का तिरस्कार करती है, और साथ ही वेतन न रुक जाए इसलिए उसकी गुलामी का समर्थन भी करती है।
अरे मूर्ख बुड्ढे, जब लोगों के सामने समझदारी से पेश आना नहीं आता, तो कम से कम अपनी ज़ुबान बंद रख। तेरी ज़िंदगी उसी के हाथों में है।
ट्रक चालक, युवा और सुंदर कुलुबेग, बच्चे की नज़रों में पौराणिक गाथाओं के नायकों का वास्तविक रूप है। बच्चा उसके बल और उसकी भलमनसाहत पर मुग्ध है तथा उसे ओरोज़कुल को परास्त कर सकने वाली एकमात्र शक्ति मानता है।
काश उसके जैसा कोई मेरा बड़ा भाई होता, तो मैं किसी से, किसी भी चीज़ से नहीं डरता—वह ऐसे सपने देखने लगा।
सेयदहमत कामचोर है, मेहनत से जी चुराता है और ओरोज़कुल के धौंस दिखाने पर उसकी चापलूसी करके टिका रहता है। ओरोज़कुल भी अपने प्रभुत्व को स्वीकार किए जाने के बदले सेयदहमत की कामचोरी को अनदेखा कर देता है।
ओरोज़कुल उसे काम से निकाल नहीं सकता था। क्योंकि वह हुक्म बजाता था। किसी बात में टांग नहीं अड़ाता था, किसी से बहस नहीं करता था।
सेयदहमत, अपनी जवानी और शारीरिक ताक़त के अहंकार में, मोमिन दादा की खिल्ली उड़ाता है। वह बूढ़े की नेकी और भलमनसाहत को उसकी बेवकूफ़ी समझता है।
सेयदहमत ठहाके मार-मारकर हँस रहा था। मोमिन का अपने पोते के साथ एक ही डेस्क पर बैठने का ख़याल ही उसे बड़ा हास्यास्पद लगा था।